वाराणसी: काशी को सनातन धर्म में मोक्षदायिनी नगरी कहा गया है। मान्यता है कि यहां बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने मात्र से भक्त को आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। हालांकि, स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुसार काशी यात्रा तभी पूर्ण मानी जाती है, जब श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के साथ-साथ काशी के पांच प्रमुख पौराणिक मंदिरों के भी दर्शन करें।
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित श्लोक के अनुसार विश्वेश्वर (काशी विश्वनाथ), माधव, ढुंढिराज गणेश, दंडपाणि और काल भैरव सहित काशी, गंगा, भवानी और मणिकर्णिका की वंदना का विशेष महत्व बताया गया है। इसी कारण काशी की परंपरागत यात्रा केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं मानी जाती, बल्कि इसे संपूर्ण आध्यात्मिक परिक्रमा का स्वरूप दिया गया है।
1. काल भैरव मंदिर
काल भैरव को काशी का कोतवाल यानी नगर का रक्षक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि उनकी अनुमति के बिना बाबा विश्वनाथ के दर्शन का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए श्रद्धालु सबसे पहले काल भैरव मंदिर में दर्शन करते हैं।
2. मां अन्नपूर्णा मंदिर
काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप स्थित मां अन्नपूर्णा को अन्न की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक दर्शन करने वाले भक्त के जीवन में अन्न और समृद्धि का कभी अभाव नहीं होता।
3. ढुंढिराज विनायक मंदिर
भगवान गणेश के इस प्राचीन स्वरूप के दर्शन काशी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। प्रथम पूज्य गणेश का आशीर्वाद लेकर ही भक्त बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आगे बढ़ते हैं।
4. बिंदु माधव मंदिर
पंचगंगा घाट पर स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहीं भगवान विष्णु ने भगवान शिव की तपस्या की थी। इसलिए इस मंदिर का काशी की धार्मिक यात्रा में विशेष महत्व माना गया है।
5. विशालाक्षी मंदिर
मणिकर्णिका घाट के निकट स्थित विशालाक्षी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती का एक अंग गिरा था। शक्ति उपासकों के लिए यह मंदिर अत्यंत पवित्र माना जाता है।
दंडपाणि मंदिर का भी विशेष महत्व
स्कंद पुराण में दंडपाणि देव का भी उल्लेख मिलता है, जिन्हें काशी का न्यायाधीश कहा गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वे धर्म की रक्षा करते हैं और अधर्म का नाश करते हैं। इसलिए कई श्रद्धालु अपनी यात्रा में उनके दर्शन भी शामिल करते हैं।
काशी यात्रा का आध्यात्मिक संदेश
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काशी की यात्रा केवल बाबा विश्वनाथ के दर्शन तक सीमित नहीं है। काल भैरव, मां अन्नपूर्णा, ढुंढिराज विनायक, बिंदु माधव और विशालाक्षी सहित इन प्रमुख देवस्थानों के दर्शन करने के बाद ही काशी यात्रा को पूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इन मंदिरों की परिक्रमा कर आध्यात्मिक शांति और पुण्य की कामना करते हैं.