नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले में वायरल हो रही मीडिया रिपोर्टों को गलत करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कोई विधिवत याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी, इसलिए तत्काल सुनवाई से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठता।
पीटीआई के अनुसार, शुक्रवार (24 जुलाई) को सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के पास केवल एक रिप्रेजेंटेशन (Representation) भेजा गया था, जिसे कानूनी रूप से याचिका नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों ने पिछले दो दिनों से पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन खबरें प्रसारित की हैं।
'मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई से इनकार नहीं किया'
सीजेआई ने कहा कि मीडिया में यह दावा किया गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया था और उन्होंने उसे तत्काल सूचीबद्ध (लिस्ट) करने से मना कर दिया। उन्होंने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि बिना विधिवत याचिका दाखिल हुए किसी मामले पर सुनवाई संभव नहीं होती।
उन्होंने कहा, "पिछले दो दिनों से पूरी तरह गलत खबरें चलाई जा रही हैं कि मामला दायर किया गया था और मुख्य न्यायाधीश ने उसे लिस्ट करने से इनकार कर दिया। यह पूरी तरह तथ्यहीन है।"
क्या है पूरा मामला?
20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों ने जंतर-मंतर से संसद तक 'संसद चलो' मार्च निकाला था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ने पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे। इस कार्रवाई के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसके बाद मामला राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया।
22 जुलाई को अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में एक लेटर पिटीशन का उल्लेख करते हुए अदालत से स्वतः संज्ञान लेने और घटना के वीडियो फुटेज देखने का अनुरोध किया था। हालांकि, सीजेआई ने स्पष्ट कर दिया कि केवल प्रतिनिधित्व भेजे जाने को याचिका नहीं माना जा सकता और अदालत किसी मामले पर तभी विचार करती है जब निर्धारित प्रक्रिया के तहत औपचारिक याचिका दाखिल की जाए।
मीडिया को जिम्मेदार रिपोर्टिंग की नसीहत
मुख्य न्यायाधीश ने मीडिया संस्थानों से न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग में जिम्मेदारी बरतने की अपील करते हुए कहा कि अदालत से जुड़ी गलत जानकारी लोगों में भ्रम पैदा करती है। उन्होंने दोहराया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने किसी याचिका पर सुनवाई से इनकार नहीं किया, क्योंकि अदालत के समक्ष ऐसी कोई याचिका आई ही नहीं थी।