यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। हूतियों ने सऊदी अरब के कई रणनीतिक और आर्थिक ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन के जरिए निशाना बनाने का दावा किया है। इनमें अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस और सऊदी अरामको से जुड़ी तेल सुविधाएं शामिल हैं। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी कई इलाकों में हमलों की पुष्टि करते हुए नागरिक ढांचे को निशाना बनाए जाने पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
आखिर हमले की 5 बड़ी वजह क्या हैं?
पहली वजह—जेल पर हुआ हवाई हमला। हूती पक्ष के मुताबिक, अल-जौफ प्रांत में एक जेल पर हुए हवाई हमले में लोगों की मौत के बाद बदले की कार्रवाई की गई।
दूसरी वजह—बाब अल-मंदेब का रणनीतिक महत्व। लाल सागर और यमन के बीच स्थित यह जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है। इस क्षेत्र में नियंत्रण को लेकर संघर्ष लगातार बढ़ा है।
तीसरी वजह—नाकाबंदी का विरोध। हूती सऊदी नेतृत्व वाले प्रतिबंधों और यमन पर लगाई गई कथित नाकाबंदी का विरोध करते रहे हैं और इसे दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखते हैं।
चौथी वजह—सऊदी अर्थव्यवस्था पर दबाव। तेल प्रतिष्ठानों, एयरपोर्ट और दूसरे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाकर हूती सऊदी अरब पर आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ाना चाहते हैं।
पांचवीं वजह—शांति वार्ता में बढ़त। सैन्य ताकत का प्रदर्शन करके हूती भविष्य की बातचीत में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं।
सऊदी और हूतियों में दुश्मनी की जड़ क्या है?
इस संघर्ष के पीछे यमन का गृहयुद्ध, क्षेत्रीय सत्ता की होड़ और सऊदी अरब-ईरान की प्रतिद्वंद्विता जैसे कई कारण हैं। 2014 में हूतियों के सना पर कब्जे के बाद संकट और गहरा गया। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन ने हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया।
आज यह संघर्ष सिर्फ यमन तक सीमित नहीं है। मिसाइल और ड्रोन हमलों ने सऊदी सुरक्षा के साथ-साथ लाल सागर के व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता को भी प्रभावित किया है। यही वजह है कि हर नया हमला मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका पैदा करता है।