नई दिल्ली: डिजिटल पेमेंट और UPI के दौर में भले ही लोग पहले से कम नकदी रखते हों, लेकिन देश में करेंसी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नोट छापने वाली कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने पॉलिमर (प्लास्टिक) नोटों के लिए वैश्विक स्तर पर टेंडर जारी किया है। इससे एक बार फिर भारत में प्लास्टिक नोटों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, RBI ने अभी 10 और 20 रुपये के नोट बदलने या उन्हें बाजार में जारी करने का कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और पॉलिमर नोटों की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
10 और 20 रुपये के नोटों से हो सकती है शुरुआत
BRBNMPL ने दुनियाभर की कंपनियों से पॉलिमर शीट की सप्लाई के लिए Expression of Interest (EOI) मांगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पायलट प्रोजेक्ट शुरू होता है तो सबसे पहले ₹10 और ₹20 के नोट पॉलिमर सामग्री में छापे जा सकते हैं। इसकी वजह यह है कि कम मूल्य वाले ये नोट सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं और सबसे जल्दी खराब भी हो जाते हैं।
क्या होते हैं पॉलिमर (प्लास्टिक) नोट?
पॉलिमर नोट सामान्य प्लास्टिक से नहीं बनाए जाते, बल्कि एक विशेष प्रकार की मजबूत प्लास्टिक फिल्म पर छापे जाते हैं। इस फिल्म पर विशेष सफेद कोटिंग की जाती है ताकि उस पर प्रिंटिंग की जा सके।
इन नोटों की सबसे खास पहचान इनमें मौजूद ट्रांसपेरेंट (पारदर्शी) विंडो होती है, जो सुरक्षा का महत्वपूर्ण फीचर है। यही वजह है कि इनकी नकली कॉपी बनाना पारंपरिक कागज के नोटों की तुलना में काफी कठिन माना जाता है।
अभी अंतिम फैसला नहीं
5 जून 2026 को मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया था कि पॉलिमर नोटों का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है। उन्होंने कहा था कि केंद्रीय बैंक इसके फायदे और संभावित चुनौतियों का अध्ययन कर रहा है और फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
पुराना है यह प्रस्ताव
भारत में पॉलिमर नोटों का विचार नया नहीं है।
- 2009 के आसपास पहली बार इस पर चर्चा शुरू हुई।
- 2012 में सरकार ने ₹10 के 100 करोड़ पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दी।
- 2014 में कोच्चि, मैसूरु, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में अलग-अलग मौसम में परीक्षण की योजना बनी।
- 2016 में सामग्री खरीदने की प्रक्रिया भी शुरू हुई, लेकिन तकनीकी और परिचालन कारणों से यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
अब करीब एक दशक बाद यह योजना फिर से चर्चा में आ गई है।
फिर क्यों बढ़ी जरूरत?
डिजिटल भुगतान बढ़ने के बावजूद देश में नकदी का चलन लगातार बढ़ रहा है। मई 2026 तक भारत में चलन में मौजूद नकदी 42.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
इसके साथ ही हर साल बड़ी संख्या में कटे-फटे और खराब नोटों को चलन से हटाना पड़ता है। वर्ष 2024-25 के दौरान करीब 23.8 अरब नोट नष्ट किए गए। नोटों की छपाई और उनके रखरखाव पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में अधिक टिकाऊ पॉलिमर नोट लंबे समय में लागत कम करने का विकल्प साबित हो सकते हैं।
पॉलिमर नोटों के फायदे
पॉलिमर नोट पारंपरिक कागज के नोटों की तुलना में कई मामलों में बेहतर माने जाते हैं।
- इनकी उम्र कागज के नोटों से ढाई से चार गुना अधिक होती है।
- पानी से जल्दी खराब नहीं होते।
- आसानी से फटते नहीं हैं।
- गंदगी कम पकड़ते हैं।
- इनकी सतह पर बैक्टीरिया कम टिकते हैं।
- आधुनिक सुरक्षा फीचर और पारदर्शी विंडो के कारण नकली नोट बनाना काफी मुश्किल हो जाता है।
क्या अभी बदल जाएंगे आपके नोट?
फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। RBI ने न तो मौजूदा ₹10 और ₹20 के नोट वापस लेने का कोई ऐलान किया है और न ही पॉलिमर नोट जारी करने की तारीख घोषित की है। अभी केवल पॉलिमर शीट खरीदने की प्रक्रिया शुरू हुई है और इसके बाद भी किसी बड़े फैसले से पहले परीक्षण और मूल्यांकन किया जाएगा।
ऐसे में फिलहाल आपके पास मौजूद ₹10 और ₹20 के नोट पूरी तरह वैध हैं और सामान्य रूप से चलते रहेंगे।