नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का पहला दिन विपक्ष के जोरदार हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा और राज्यसभा में लगातार विरोध प्रदर्शन के चलते कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी और दोनों सदनों की कार्यवाही को कुल छह बार स्थगित करना पड़ा।
विपक्षी दलों ने नीट पेपर लीक और राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए सरकार को घेरा। हंगामे के दौरान कुछ विपक्षी सांसद पोस्टर और बैनर लेकर सदन के भीतर पहुंच गए, जिसके चलते दोनों सदनों में बार-बार व्यवधान उत्पन्न हुआ।
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे बच्चों और युवाओं की आवाज दबाई जा रही है। खड़गे ने कहा कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने का प्रयास किया है।
वहीं, हंगामे के बीच लोकसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित विधेयक पेश किया। शोर-शराबे के बावजूद सरकार ने विधायी कार्य आगे बढ़ाने की कोशिश की।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के हंस द्वार पर मीडिया को संबोधित करते हुए विपक्ष से सकारात्मक सहयोग की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा, "मानसून हो या मानसून सत्र, अगर दोनों प्रो-एक्टिव हों तो बहुत ही प्रोडक्टिव होते हैं। संसद में तर्क और तथ्यों के आधार पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए।"
मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिला। विपक्ष जहां विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम रहा, वहीं सरकार ने विधायी एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश की। ऐसे में आने वाले दिनों में भी संसद में तीखी बहस और हंगामे के आसार बने हुए हैं।