ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा की चुनावी जीत को भारत-ब्राजील संबंधों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। दोनों देश लंबे समय से व्यापार, वैश्विक कूटनीति और विकासशील देशों के हितों जैसे मुद्दों पर सहयोग करते रहे हैं। ऐसे में ब्राजील की राजनीति में निरंतरता का असर द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ सकता है।
भारत-ब्राजील संबंधों को मिल सकती है निरंतरता
भारत और ब्राजील दोनों ‘ग्लोबल साउथ’ की भूमिका मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार की वकालत करते हैं। लूला की विदेश नीति में बहुपक्षवाद और रणनीतिक स्वायत्तता को महत्व दिया जाता रहा है। भारत भी विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ अपने हितों के आधार पर संबंध बनाए रखने की नीति अपनाता है।
हालांकि, दोनों देशों की प्राथमिकताएं हर मुद्दे पर समान हों, यह जरूरी नहीं है। इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने जैसे विषय सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बने रह सकते हैं।
20 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य पर नजर
भारत और ब्राजील के बीच व्यापारिक संबंध इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भारत ब्राजील को पेट्रोलियम उत्पाद, दवाएं, रसायन, कृषि-रसायन और इंजीनियरिंग उत्पाद निर्यात करता है। वहीं, ब्राजील से भारत कच्चा तेल, सोयाबीन तेल, चीनी, कपास और लौह अयस्क जैसे उत्पाद आयात करता है।
दोनों देशों के पास व्यापार को अधिक विविध बनाने की गुंजाइश है। भारतीय दवा कंपनियां ब्राजील में अपनी पहुंच बढ़ा सकती हैं, जबकि कृषि और खाद्य आपूर्ति के क्षेत्र में सहयोग भारत के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, व्यापार बढ़ाने के लिए टैरिफ, नियामकीय प्रक्रियाओं और परिवहन लागत जैसी चुनौतियों से निपटना होगा।
BRICS और वैश्विक संस्थानों में सुधार
भारत और ब्राजील BRICS के प्रमुख सदस्य हैं। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत वैश्विक संस्थानों में सुधार और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने का समर्थन करते रहे हैं। ब्राजील का भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को समर्थन देना भी दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों का अहम पहलू है।
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटाने की संभावनाओं पर भी सहयोग बढ़ सकता है। यदि रुपया और ब्राजील की मुद्रा रियल में भुगतान की व्यवस्था व्यावहारिक साबित होती है, तो कारोबारियों को अमेरिकी डॉलर के अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए वित्तीय और नियामकीय चुनौतियों का समाधान जरूरी होगा।
ऊर्जा, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों में अवसर
ब्राजील को कृषि, जैव ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा का व्यापक अनुभव हासिल है। भारत इथेनॉल, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल और हरित ऊर्जा के क्षेत्रों में उससे सहयोग बढ़ा सकता है। महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों की आपूर्ति श्रृंखला में साझेदारी भी भारत की विनिर्माण क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए उपयोगी हो सकती है।
वहीं, भारत की डिजिटल तकनीक, UPI और डिजिटल पहचान से जुड़ा अनुभव ब्राजील के लिए सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकता है।
कुल मिलाकर, लूला की जीत भारत-ब्राजील संबंधों में मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर दे सकती है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश व्यापार, निवेश, तकनीक और कूटनीति से जुड़े साझा लक्ष्यों को किस हद तक ठोस समझौतों और परिणामों में बदल पाते हैं।